पाँच दशकों में खनिज गवेषण में एमईसीएल की समर्पित सेवाओं के परिणामस्वरूप विभिन्न खनिजों की खनिज मालसूची को अद्यतन बनाने का कार्य हुआ और भारत में अनेक खनिज आधारित उद्योगों और कंपनियों की स्थापना हुई । स्थापनाकल से अब तक इसने विस्तृत खनिज गवेषण , खान विकास की १६३० से अधिक परियोजना पूर्ण की है और २,००,३१७ मिलियन टन खनिज निचय प्रमाणित किए हैं । गवेषण निविष्टियों में १३.१५ मिलियन मीटर वेधन , ५.४७ मिलियन मीटर भूभौतिकी लॉगकरण , १०,३४३ वर्ग किमी. विस्तृत भूवैज्ञानिक मानचित्रण एवं स्थलाकृतिक सर्वे क्षण और ०.२९ मिलियन मीटर समन्वेषी एवं विकासात्मक खनन सम्मिलित है । इसके अतिरिक्त सुदूर संवेदी और पर्यावरणीय अध्ययनों पर भी 186 से अधिक परियोजनाएं पूर्ण की गई है ।
कंपनी की मुख्य ताकत अच्छी अहर्ता प्राप्त और अनुभवी गवेषण भूवैज्ञानिक , भूभौतिकीविदों , विश्लेषी रसायनज्ञों , वेधन और खनन अभियंताओं और सर्वेक्षकों की इसकी टीम है, जो अत्याधुनिक कंप्यूटर सुविधाओं के साथ उच्च कुशल, प्रशिक्षित तकनीकी और वैज्ञानिक कर्मचारियों द्वारा समर्थित है।।
किए गए खनिज गवेषण का सारांश:-
लौह : लौह अयस्क क्षेत्र में एमईसीएल ने 49508 मिलियन मी. वेधन और 7062 मी. समन्वेषी खनन तथा संबद्ध भूवैज्ञानिक कार्य एवं प्रयोगशाला अध्ययनों के साथ 2617 मिलियन टन निचय प्रमाणित किया है । ग्राहकों में मेसर्स एसएआईएल,केआईओसीएल,डालमिया इन्टरनेशनल,सिंधुदुर्ग माइनिंग कार्पोरेशन,भिलाई स्टील प्लान्ट,एनआईएनएल आदि का समावेश है । चिरिया,झारखंड राज्य में 62-15% लौह के 1970 मिलियन टन का एकल सबसे बड़ा लौह अयस्क निक्षेप प्रमाणित किया ।
बॉक्साइट : एमईसीएल ने आंध्र प्रदेश,ओडिशा,महाराष्ट्र,गोवा,केरल,छत्तीसगढ़ और झारखंड राज्यों में 1,78,038 मी. वेधन और 12121 मी. खनन तथा संबध भूवैज्ञानिक अध्ययनों के साथ 31 निक्षेपों (40 ब्लॉक) में गत तीन दशकों में बॉक्साइट गवेषण किया है । कुल 1277 मिलियन टन मेटालर्जिकल ग्रेड बॉक्साइट निचय प्रमाणित किए गए । ग्राहकों में नाल्को,बाल्को,एल एण्ड टी,हिंडाल्को,डीजीएम (तत्कालीन बिहार),स्टरलाइट आदि शामिल है ।
ताम्र : 61 ब्लॉक में जो झारखंड,कर्नाटक,मध्यप्रदेश,महाराष्ट्र,उड़ीसा,राजस्थान और सिक्किम में स्थित हैं ,358010 मी. वेधन ,20764 मी. समन्वेषी खनन और अन्य भूवैज्ञानिक कार्य के साथ 612 मिलियन टन ताम्र अयस्क एमईसीएल ने प्रमाणित किया है । एमईसीएल के कार्य के आधार पर मलांजखंड में सबसे बड़ी ओपन कास्ट माइन और बनवास की समृद्ध ताम्र संभावना का पताचला जो एचसीएल की जीवन रेखा है ।
सीसा और जस्ता : एमईसीएल ने आंध्र प्रदेश,गुजरात,महाराष्ट्र,राजस्थान,उत्तरांचल और पश्चिम बंगाल राज्यों में 29 परियोजनाओं में गवेषण कार्य किया जिसमें 112285 मी. का वेधन,16025 मी. का खनन और 176 मिलियन टन के निचय प्रमाणित किए गए । विगत हाल में एमईसीएल द्वारा गवेषित आशाप्रद सीसा जस्त पूर्वेक्षणस्थल में अजमेर जिला,राजस्थान का कयर उल्लेखनीय है जिसमें 2.66% सीसा और 14.89% जस्त के साथ 10.14 मिलियन टन के अयस्क निचय प्रमाणित किए गए ।
स्वर्ण : एमईसीएल ने आंध्र प्रदेश,कर्नाटक,झारखंड और केरल राज्यों में स्वर्ण के 42 खण्डों/निक्षेपों में गवेषण किया जिसमें 136350 मी. के वेधन और 27951 मी. के खनन और संबद्ध भूवैज्ञानिक कार्य के माध्यम से 45.35 मिलियन टन निचय प्रमाणित किए । एमईसीएल आंकड़ों के आधार पर तत्कालीन बीजीएमएल द्वारा चिगरगुंटा में भूमिगत स्वर्ण खनन तथा एचजीएमएल द्वारा ऊटी में ओपन कास्ट माइन का विकास किया गया । आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के दोना में स्वर्ण निक्षेप का एमईसीएल द्वारा विस्तृत गवेषण किया गया जिसके परिणामस्वरूप प्रति टन 2 ग्राम स्वर्ण से अधिक का 7.77 मिलियन टन निचय प्रमाणित हुआ ।
कोयला : एमईसीएल ने आंध्र प्रदेश,अरुणाचल प्रदेश,आसाम,छत्तीसगढ़, झारखंड,मध्यप्रदेश,मेघालय,नागालैंड,उड़ीसा,सिक्किम और पश्चिम बंगाल राज्यों में 879 से अधिक खण्डों में कोयला गवेषण कार्य पूर्ण किया । कुल 4624325 मी. का वेधन और 42112 मी.खनन और संबध भूवैज्ञानिक कार्य के परिणामस्वरूप 95109 मिलियन टन के कोककर और अकोककर कोयला निचय प्रमाणित हुए ।
लिग्नाइट : एमईसीएल द्वारा गुजरात,जम्मू एवं कश्मीर,राजस्थान और तमिलनाडु राज्यों में 1599630 मी. वेधन और 879 मी. खनन के माध्यम से 36933 मिलियन टन लिग्नाइट निचय स्थापित किया गया । बीकानेर राजस्थान के रीरी में विशाल लिग्नाइट निचयों की हाल ही खोज के लिए एमईसीएल के वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय खनिज पुरस्कार प्राप्त किया ।
कोल बेड मीथेन (सीबीएम) : एमईसीएल सीबीएम के लिए स्लिम होल ड्रिलिंग में एक अग्रणी एजेंसी के रूप में उभरा है तथा वर्तमान में सीबीएम हेतु उत्पादन कूप वेधन के लिए सेवाएँ प्रदान करने की योजना बना रहा है । यह सीबीएम अन्वेषण में पिछले 10 वर्षों से रहा है और गेल,ओएनजीसी, जीईईसीएल,डीजीएच-टिडको,डीओपी,राजस्थान,सीएमपीडीआईएल नामक एजेंसियों तथा कोयला मंत्रालय की ओर से सफलतापूर्वक अन्वेषण पूर्ण किया है । इसने गोंडवाना फार्मेशन,झरिया कोयला क्षेत्र में 1400 मीटर के सबसे गहरे वेध छिद्र के साथ लगभग 50 वेधछिद्रों में 68319 मी. स्लिम होल ड्रिलिंग पूर्ण किया है ।
ऑइल शेल : एमईसीएल ने बीआरजीएम फ्रांस के साथ डायरेक्टेरेट जनरल ऑफ हाइड्रोकार्बन्स,भारत सरकार की ओर से आसाम और अरुणाचल प्रदेश के भागों में ऑइल शेल निक्षेप में सिनक्रूड ऑइल संभावना के संबंध में संसाधन आकलन हेतु सफलतापूर्वक अध्ययन पूर्ण किया ।
नमक : एमईसीएल ने मेसर्स ओएनजीसी की एक प्रतिष्ठित परियोजना बीकानेर क्षेत्र की नमक कन्दराओं की पहचान के लिए सफलतापूर्वक गवेषण पूर्ण किया । यह एक विशेषज्ञतापूर्ण किया गया कार्य है जिसमें 1032 मी. सबसे गहरे वेधछिद्र के साथ कुल 3136 मी. वेधन किया गया ।
चूना पत्थर : एमईसीएल ने 29760 मी. वेधन और 1880 मी.खनन कार्य करके आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़,केरल,मध्यप्रदेश,मेघालय और राजस्थान राज्यों के 9 निक्षेपों में 2459 मिलियन टन एसएमएस एवं सीमेंट ग्रेड चूनापत्थर निचय प्रमाणित किया ।
भूतकनीकी अन्वेषण: एमईसीएल ने अरुणाचल प्रदेश,आसाम (सुबेनसिरी बेसिन),मध्यप्रदेश,हिमाचल प्रदेश (चमेरा हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना) राज्यों और जम्मू एवं कश्मीर (दुलहस्ती हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना और पीर पंजाल रेल सुरंग) के अत्यंत ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सुरंग,बांध स्थल अन्वेषण आदि जैसे भूतकनीकी अध्ययनों के लिए भी सफलतापूर्वक वेधन पूर्ण किया।
भू-ऊष्मीय अध्ययन : एमईसीएल ने 1991 में लद्दाख (जम्मू एवं कश्मीर) में भूतापीय ऊर्जा हेतु गवेषण कार्य किया और सीईए तथा एनएनआरई के साथ में भूतापीय गवेषण कार्य हाथ में लिये जाने की संभावना है ।
अन्य खनिज : टिन,टंगस्टन,रॉक फास्फेट,डायमंड आदि के गवेषण के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है ।